क्या आप जानते हैं कि गुजरात में एक ऐसा कुआँ है जो जमीन के नीचे एक पूरा महल जैसा दिखता है? 1000 साल पुरानी यह संरचना इतनी भव्य है कि इसे UNESCO ने विश्व धरोहर घोषित किया है! आज हम जानेंगे रानी की वाव का इतिहास, रहस्य और इसकी अद्भुत वास्तुकला।
📜 इतिहास
रानी की वाव का निर्माण 11वीं शताब्दी में हुआ था। इसे सोलंकी वंश के राजा भीमदेव प्रथम की याद में उनकी पत्नी रानी उदयमती ने बनवाया था। यह वाव गुजरात के पाटन शहर में स्थित है, जो उस समय सोलंकी साम्राज्य की राजधानी था।
🏛 वास्तुकला और खासियत
यह एक सीढ़ीदार कुआँ (Stepwell) है। इसमें लगभग 7 मंज़िलें हैं। 500 से अधिक मूर्तियाँ बनी हुई हैं। भगवान विष्णु के दशावतार सहित कई देवी-देवताओं की सुंदर नक्काशी की गई है। सबसे खास बात – यह वाव उल्टे मंदिर की तरह बनाई गई है, यानी नीचे जाते-जाते इसकी भव्यता बढ़ती जाती है।
🌊 क्यों दब गई थी जमीन के नीचे?
समय के साथ सरस्वती नदी में आई बाढ़ और मिट्टी भर जाने से यह वाव सदियों तक जमीन के नीचे दबी रही। 1980 के दशक में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने इसे दोबारा खोजा और संरक्षित किया।
🌍 विश्व धरोहर का दर्जा
2014 में UNESCO ने इसे विश्व धरोहर स्थल घोषित किया। आज यह भारत की प्राचीन जल प्रबंधन प्रणाली और कला का शानदार उदाहरण है।

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